आइए जानते है एक साहसी लड़की मलाला यूसुफजई की कहानी, उनकी तरफ पिस्तौल दिखाई और तीन गोलिया…………….

0
142

 

नोबल पुरस्‍कार व‍िजेता मलाला यूसुफजई की बायोप‍िक ‘गुल मकई’ का फर्स्‍ट लुक पोस्‍टर र‍िलीज कर द‍िया गया है।  डायरेक्‍टर अमजद खान की इस फ‍िल्‍म में जानी मानी टीवी एक्ट्रेस रीम शेख मलाला का क‍िरदार न‍िभाएगी। फ‍िल्‍म के पोस्‍टर में रीम शेख का आधा चेहरा द‍िख रहा है और उनके हाथ में क‍िताब है। पोस्‍टर में क‍िताब में धमाका होते द‍िख रहा है।

रीमा सिंह

मलाला का जन्म पाकिस्तान के मिंगोरा में 12 जूलाई 1997 को हुआ था |

बचपन से ही लडकियो को भी लडको की तरह शिक्षा का हक देने की आवाज बुलंद करनी आरम्भ कर दी | उनके पिता ने मलाला के जन्म पर जश्न मनाया। माता-पिता ने बच्ची  का नाम मलाला रखा। उनकी पश्तो जाति अफगानिस्तान और पाकिस्तान की सीमा के आस पास की बसी थी और पाकिस्तान में एक लोक कथा प्रचलित है जिसमें मईवाड़ नामक प्रांत में मलालाई नाम की एक लड़की रहती थी जो एक चरवाहे की बेटी थी। उस समय उनका गांव मईवाड़ अंग्रेजों के कब्जे में था जिसे छुड़ाने के लिए अंग्रेजो के साथ गांव वालों का युद्ध हुआ। जब मलालाई को यह पता चला की युद्ध में गांव के कई नौजवान घायल हो गए तो उनकी मरहम पट्टी और पानी पिलाने के लिए वह युद्ध भूमि में चली गई। जहां उसने अपने गांव के नौजवानों को हारते हुए देखा। देश का झंडा जमीन पर गिरने लगा वह उसे उठाकर जोर से नौजवानों को प्रेरित करने लगी। तभी उन पर गोली चला दी गई। वहीं पर वह शहीद हो गई। तब से इतिहास में उनका नाम मलालाई मईवाड़ के नाम से प्रसिद्ध है। काबुल के बीचोंबीच उनकी याद में एक मईवाड़ विजय स्मारक बना हुआ है। मलालाई के नाम पर मलाला के पिता ने उनका यह नाम रखा।

 

मलाला अपने पिता जियाउद्दीन युसुफजई के स्कूल में पढती थी | जब तालिबान इलाकाई लडकियों के स्कूलों को निशाना बनाने लगे तो मलाला ने सितम्बर 2008 में एक भाषण दिया ,जिसका शीर्षक था “तालिबान शिक्षा के मेरे बुनियादी अधिकार को छीनने की हिमाकत कैसे कर सकते है ?”किस्तान की ‘न्यू नेशनल पीस प्राइज’ हासिल करने वाली 14 वर्षीय मलाला यूसुफजई ने तालिबान के फरमान के बावजूद लड़कियों को शिक्षित करने का अभियान चला रखा है। तालिबान आतंकी इसी बात से नाराज होकर उसे अपनी हिट लिस्‍ट में ले चुके थे। संगठन के प्रवक्ता के अनुसार,‘यह महिला पश्चिमी देशों के हितों के लिए काम कर रही हैं। इन्‍होंने स्वात इलाके में धर्मनिरपेक्ष सरकार का समर्थन किया था। इसी वजह से यह हमारी हिट लिस्ट में हैं।

 

 

अक्टूबर 2012 में, स्‍कूल से लौटते वक्‍त उस पर आतंकियों ने हमला किया एक गनमैन में उनसे उनका नाम पूछा, और उनकी तरफ पिस्तौल भी दिखाई और तीन गोलिया चलाई. एक गोली योसुफ़जाई के सिर के बायीं तरफ लगी, और एक उनके कंधे पर लगी. गनमैन ने तेज़ी से उनपर हमला किया लेकिन वह पूरी तरह से अचेत हो चुकी थी और गोलिया लगने के कारण उनकी हालत और भी ख़राब हो गयी थी. लेकिन जब उन्हें जल्दी से स्वास्थलाभ के इरादे से इंग्लैंड में बिर्मिंघम के क्वीन एलिज़ाबेथ हॉस्पिटल में ले जाया गया तो उनकी हालत में थोडा सुधार आया.बाद में इलाज के लिए उन्हें ब्रिटेन ले जाया गया जहाँ डॉक्टरों के अथक प्रयासों के बाद उन्हें बचा लिया गया।

बार-बार मलाला और उनके परिवार पर होते हुए हमलो को देख योसुफ़जाई के परिवार को राष्ट्रिय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर समर्थन मिला. डच वेल्ले ने जनवरी 2013 में यह लिखा की योसुफ़जाई “विश्व की सबसे प्रसिद्धि कम उम्र की महिला है”, योसुफ़जाई को सम्मानित करते हुए यूनाइटेड नेशन के विशेष दूतो ने ग्लोबल एजुकेशन के लिए UN याचिका को योसुफ़जाई का नाम दिया. जिसमे यह संबोधित किया गया था की 2015 के अंत तक उनके स्थानिक गाव के हर बच्चे को पढने के लिये स्कूल भेजा जायेगा. इससे पकिस्तान में सभी को शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार भी मिला.

 

वर्ष 2013 और 2014 में उसका नाम नोबल शान्ति पुरूस्कार के लिए नामित दिया गया | बच्चों और युवाओं के दमन के ख़िलाफ़ और सभी को शिक्षा के अधिकार के लिए संघर्ष करने वाले भारतीय समाजसेवी कैलाश सत्यार्थी के साथ संयुक्त रूप से उन्हें शांति का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया। १० दिसंबर २०१४ को नाॅर्वे मे आयोजित एक कार्यक्रम मे यह पुरस्कार प्रदान किया गया।http://www.nationnews9.com