आज पढ़िए मानव रोग के बारे में , जो आपके परीक्षा में करेगा काफी मदद

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शरीर में होने वाली अनेक प्रकार की अनियमितताओं को मानव रोग कहा जाता है रोगों के उपचार के लिए दवाओं का प्रयोग सबसे पहले हिप्पोक्रेटस् ने किया था इस कारण इन्हें औषधि विज्ञान का पिता   कहा जाता है.

मानव रोग दो प्रकार का होता है-

जन्मजात रोग ‘, उपार्जित रोग

जन्मजात रोग – यह रोग गर्भावस्था तथा जन्म के समय ही जीवो में विद्यमान रहते है यह रोग अनेक कारणों से हो सकते है जैसे ग्राभावस्था के समय चोट या भूर्ण के गुण सूत्रों में असमानता आदि हिमोफिलया अजय की विकार वर्णांधता आदि जन्मजात रोग है .

उपार्जित रोग -यह रोग जन्म के बाद तथा जीवन काल के दौरान शरीर में उत्पन्न होते हैं उपार्जित रोग दो प्रकार के होते हैं.

संक्रामक रोग , असंक्रामक रोग

संक्रामक रोग और असंक्रामक रोग  के बारे हम आपसे कल चर्चा करेंगे . जाते जाते हम आपको बताते चलते है की

पैथोजन सूक्ष्म जीव जो रोग उत्पन्न करते है उस रोगों के अध्यन को पैथोलाजी है .