गूगल ने आज इन्हें अपना डूडल समर्पित किया

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हिंदी की प्रतिष्ठित कवियित्री महादेवी वर्मा, जिन्हें आधुनिक मीरा भी कहा जाता है, की कृतियों के प्रति सम्मान जताते हुए आज का गूगल डूडल उन्हें समर्पित किया गया है.हिंदी साहित्य से जुड़ाव रखने वालों के लिए ये नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं

उत्तरप्रदेश में जन्मी इस कवियित्री के नाम के पीछे भी इतिहास है. कई पीढ़ियों के बाद उनके परिवार में लड़की का जन्म हुआ इसलिए उनका नाम बड़े चाव से महादेवी रखा गया. सात साल की उम्र से लिखना शुरू कर दिया और स्कूल खत्म होते न होते इनका नाम साहित्यिक जगत में जाना जाने लगा था.और स्कूल खत्म होते होते  इनका नाम साहित्यिक जगत में जाना जाने लगा था.उस समय के चलन के अनुसार 9 बरस में ही महादेवी की शादी कर दी गई, हालांकि पढ़ाई के लिए वे पति से अलग इलाहाबाद में रहती रहीं.

महादेवी प्रकृति के बेहद करीब रहीं और इनकी कविताओं में इसकी झलक साफ दिखती है.  महादेवी की कविताओं में प्रेम और करूणा के अलावा एक और चीज जो देखने को मिलती है, वो है स्त्री मुक्ति की उनकी पुकार. स्कूल के दौरान ही उन्होंने Sketches from My Past नाम से कहानियां लिखीं, साहित्य में योगदान के लिए 80 के दशक में इस छायावादी कवियित्री को ज्ञानपीठ मिला और इसके बाद से पुरस्कारों का सिलसिला चल निकला. 11 सितंबर 1987 को अपनी कर्मभूमि इलाहाबाद में ही उनका देहांत हो गया.

महादेवी वर्मा वो औरत है जिसने दशको पहले हिंदी कविता जगत में अपनीं कविताये लिखनी शुरू कर दी थी. कहा जाता है कि छायावाद के चार स्तंभों में से एक महादेवी वर्मा ने ७ बरस से ही कविताये लिखनी शुरू क्र दी थी. इन्हें दर्जनों साहित्यिक पुस्कारो से सम्मानित किया गया है. महादेवी वर्मा स्त्री अधिकारों के लिए भी उतनी ही मुखर थी.