गीतकार गुलजार से जुड़े 10 प्रमुख तथ्य

हिंदी मनोरंजन और साहित्‍य जगत को अपने गीतों के गुलशन से महकाने वाले गुलजार का जन्म 18 अगस्त 1934 को दीना, जिला झेलम, पाकिस्तान में हुआ था।

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अभिषेक दुबे 

संवाददाता 

हिंदी मनोरंजन और साहित्‍य जगत को अपने गीतों के गुलशन से महकाने वाले गुलजार का जन्म 18 अगस्त 1934 को दीना, जिला झेलम, पाकिस्तान में हुआ था। गुलजार ने न जाने कितने ही ऐसे गीतों से दुनिया को रूबरू कराया है, जिन्‍होंने लोगों की आत्‍मा को छुआ है। वैसे तो गुलजार गीतकार के रूप में मशहूर हैं पर उन्हें पटकथा लेखन, फिल्म निर्देशन, नाट्यकला, कविता लेखन में भी महारत हासिल है। उन्हें 2004 में भारत के सर्वोच्च सम्मान पद्म भूषण से भी नवाजा जा चुका है। इसके अलावा उन्हें 2009 में फिल्म ”स्लमडॉग मिलियनेयर” में उनके लिखे गीत ‘जय हो’ के लिये सर्वश्रेष्ठ गीत का ऑस्कर पुरस्कार मिल चुका है। आज हम लाए हैं, गुलजार के जीवन से जुड़ीं कुछ रोचक तथ्य-

🔶 सिख परिवार में जन्में गुलजार का नाम संपूर्ण सिंह कालरा था। इनके पिता का नाम माखन सिंह कालरा और मां का नाम सुजान कौर था। बॉलीवुड में उन्होंने गुलजार के नाम से अपनी खास पहचान बनाई।

🔶 बचपन में ही मां के गुजर जाने के बाद गुलजार को पिता का ज्यादा प्यार नहीं मिल पाया। देश के बंटवारे के चलते उनकी पढ़ाई भी छूट गई और उनका परिवार अमृतसर में रह गया और वो मुंबई चले आए।

🔶 पैसों की तंगी के चलते गुलजार ने एक गैराज में मकैनिक का काम करना शुरू किया। गुलजार को बचपन से ही लिखने का शौंक था, इसलिए गैराज में खाली समय में वो कविताएं लिखा करते थे।

🔶 उनके जीवन का टर्निंग प्वॉइंट था महान निर्देशक बिमल रॉय से मुलाकात। एस.डी.बर्मन और उस समय फिल्म बंदिनी के गीतकार के बीच मनमुटाव हो गया था। इससे परेशान फिल्म के निर्देशक बिमल रॉय ने गुलजार को बंदिनी के लिए गाना लिखने का मौका दिया।

🔶 गुलजार ने निर्देशक के तौर पर अपने करियर की शुरुआत 1971 में ‘मेरे अपने से की थी’। इससे पहले बतौर लेखक उन्होंने आशीर्वाद, आनंद, खामोशी जैसी फिल्मों के लिए डॉयलॉग्स और स्क्रिप्ट लिखी थी।

🔶 बाद में गुलजार ने आंधी और किरदार जैसी फिल्में डायरेक्ट कीं। यहीं नहीं उन्होंने टीवी सीरीज मिर्जा गालिब का भी निर्देशन किया।

🔶 गुलजार को बॉलीवुड की एक पार्टी में मिली मशहूर अभिनेत्री राखी से पहली नजर में ही प्‍यार हो गया था। दोनों ने 1973 में शादी कर ली। आपसी अनबन के कारण दोनों एक साल के अंदर ही अलग हो गए पर उन्‍होंने कभी तलाक नहीं लिया। दोनों की एक बेटी मेघना गुलजार भी है।

🔶 फिल्म कोशिश, मौसम और इजाजत के लिए 3 नेशनल अवार्ड और 21 फिल्म फेयर अवार्ड मिले। इसके अलावा 2004 में पद्मभूषण, 2013 में दादा साहेब फाल्के अवार्ड मिला।

🔶 गुलजार अपने कॉलेज के दिनों से ही बस सफेद कपड़े पहन रहे हैं। वे उर्दू में लिखना बहुत पसंद करते हैं। उन्‍होंने उर्दू और पंजाबी के अलावा ब्रज भाषा, खड़ी बोली, हरियाणवी और मारवाड़ी भाषा में भी गीत लिखे।

🔶 गुलजार ने 1973 की फिल्म ‘कोशिश’ के लिए साइन लैंग्वेज सीखी थी क्योंकि ये फिल्म मूक-वधिर विषय पर थी। उन्हें टेनिस खेलना बेहद पसंद है, और वे हर सुबह टेनिस जरूर खेलते हैं। http://www.nationnews9.com