रोजगार ही रोजगार, गधे की पूछ बढ़ी

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तत्काल रोजगार चाहिए, तो पक्कामहल में चले जाइए. यहां कई प्रकार के काम हैं. अपनी रुचि के अनुसार आप काम की तलाश कर सकते हैं. मसलन जो लोग अपना घर शासन-प्रशासन को बेच दिए हैं, उसे धराशाई करने का ठेका ले सकते हैं. इसमें अच्छी आमदानी है. #धरोहर जाए चूल्हे भाड़ में ! इसीलिए कल तक जो धरोहर बचाओ संघर्ष समिति में थे, उसमें से कुछ चेहरे इस धंधे में जुट गए हैं.

अगर ठेकेदारी नहीं कर सकते हैं, तो फिर प्रशासन को मकान बेचवाने की “दलाली” के काम में जुट जाइए. जो लोग जमीन और घर बेचवाने के धंधे में हैं, वो इस गणित को आसानी से समझ सकते हैं. यानी जो बेचा और जिसने खरीदा दोनों तरफ से 2-3 फीसदी कमीशन ! जैसा आपका जुगाड़ है, यह उस पर यह निर्भर है.

घर तोड़ने के लिए मजदूर चाहिए, तो इसका भी जुगाड़ करना पड़ेगा. दलाली और ठेकेदारी नहीं कर सकते हैं, तो हथौड़ा लेकर घर तोड़ने का काम भी शुरू कर सकते हैं. उसके बाद टूटी मकान व गली में बिखरे मलवे को हटाने की जरूरत पड़ेगी. 5-6 फुट की पतली व घुमावदार गलियों में कोई वाहन तो जा नहीं सकता है. तो फिर आखिर इस काम को कौन करेगा ?

जाहिर सी बात है कि मलवे को हटाने के लिए गधे/खच्चर की जरूरत पड़ेगी. उन्हीं की पीठ पर मलवा लादकर गली से बाहर मेन रोड तक दशाश्वमेध, गोदौलिया या बांसफाटक सड़क तक लाया जा सकता है. तो इस काम को भी किया जा सकता है. जैसी आपकी क्षमता है, उसके अनुसार आप काम में लग सकते हैं. फिलहाल कई मकान तोड़े जा चुके हैं और 10-15 मकानों को गिराने का काम चल रहा है. तो है न पक्कामहल क्षेत्र में रोजगार का सुनहरा अवसर !

मकानों को ध्वस्त करने के बाद नवनिर्माण का काम चलेगा. उसमें भी खूब रोजगार के अवसर मिलेंगे. यह सब विश्वनाथ मंदिर काॅरिडोर और गंगा पाथवे की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना को साकार करने के लिए किया जा रहा है. इस काम में कोई बाधा न पहुंचे, इसका इंतजाम भी कर दिया गया है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र विकास परिषद का अध्यादेश पारित कर दिया है. यह परिषद वाराणसी विकास प्राधिकरण से स्वतंत्र है. और इसके काम में कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकता है. जिला प्रशासन भी नहीं.

पक्कामहल में विश्वनाथ मंदिर के आसपास कालिका गली, लाहौरी टोला, सरस्वती फाटक, शकरकंद गली, रानी भवानी गली, डेढ़मल गली, मीरघाट गली, त्रिपुरा भैरवी, मानमंदिर गली, ललिताघाट गली आदि सिर्फ गलियां ही नहीं हैं. इन गलियों में फैला है, एक पूरा बाजार ! ये गलियां व्यापार की केन्द्र हैं. हजारों लोगों की इससे जीविका चलती है.

विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन करने आने वाले देशी-विदेशी src=”https://nationnews9.com/wp-content/uploads/2018/09/IMG-20180929-WA0049-225×300.jpg” alt=”” width=”225″ height=”300″ class=”alignnone size-medium wp-image-6027″ /> इनके प्रमुख ग्राहक हैं. ये गलियां बनारस की संस्कृति की पहचान और जीवनशैली को रेखांकित करतीं हैं. और यही इसका आकर्षण है. जिसे एक बार जो देखा और महसूस किया वो बार-बार यहां आना चाहता है.

ये गलियां अपने आप में एक अद्भुत भूलभुलैया हैं. कई तो बंद गलियां हैं, जिसमें यदि आप घुस गए तो पुन: वापस आना पड़ेगा. कुछ गलियां ऐसी हैं, जिसमें घुसने पर आपको महसूस होगा कि किसी के घर में आ गए. लेकिन ऐसा नहीं है ! वो आने-जाने का रास्ता हैं. और यही है इनका सौन्दर्यबोध ! जिसे देखने देशी-विदेशी सैलानी प्रतिदिन आते हैं.

ये गलियां अपने सीने में खामोशी से हजारों वर्ष का इतिहास समेटे हैं ! जिसे 21वीं सदी में “विकास” ललचाई नजर से देख रहा है. और उसके अस्तित्व को खत्म करने के लिए खजाने की तिजोरी खोलकर बैठा है ! रुपये में बहुत दम होता है, साहब ! अच्छे-अच्छे लोगों का ईमान डोल जाता है. और वो अपने बाप-दादे की पहचान, वसीयत और धरोहर बेचकर रुपये की गठरी लेकर चले जाते हैं. जिसे अपनी संस्कृति, जीवनशैली, पहचान और विरासत से मोह है, वो लड़ें ! उन्हें भी खरीदने के लिए दलालों ने अपना जाल फेंक दिया है. यह देखना दिलचस्प होगा कि इस जंग में कौन जीतता है.